वह पचास वरà¥à¤· से ऊपर था. तब à¤à¥€ यà¥à¤µà¤•ों से अधिक बलिषà¥à¤ और दृढ़ था. चमड़े पर à¤à¥à¤°à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ नहीं पड़ी थीं. वरà¥à¤·à¤¾ की à¤à¤¡à¤¼à¥€ में, पूस की रातों की छाया में, कड़कती हà¥à¤ˆ जेठकी धूप में, नंगे शरीर घूमने में वह सà¥à¤– मानता था. उसकी चढ़ी मूà¤à¤›à¥‡à¤‚ बिचà¥à¤›à¥‚ के डंक की तरह, देखनेवालों की आà¤à¤–ों में चà¥à¤à¤¤à¥€ थीं. उसका साà¤à¤µà¤²à¤¾ रंग, साà¤à¤ª की तरह चिकना और चमकीला था. उसकी नागपà¥à¤°à¥€ धोती का लाल रेशमी किनारा दूर से ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करता. कमर में बनारसी सेलà¥à¤¹à¥‡ का फेंटा, जिसमें सीप की मूठका बिछà¥à¤† खà¥à¤à¤¸à¤¾ रहता था. उसके घà¥à¤à¤˜à¤°à¤¾à¤²à¥‡ बालों पर सà¥à¤¨à¤¹à¤²à¥‡ पलà¥à¤²à¥‡ के साफे का छोर उसकी चौड़ी पीठपर फैला रहता. ऊà¤à¤šà¥‡ कनà¥à¤§à¥‡ पर टिका हà¥à¤† चौड़ी धार का गà¤à¤¡à¤¼à¤¾à¤¸à¤¾, यह à¤à¥€ उसकी धज! पंजों के बल जब वह चलता, तो उसकी नसें चटाचट बोलती थीं. वह गà¥à¤‚डा था.